अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
पृष्ठ 61, कुल 173 में से
संदर्भ में पढ़ें(५४) अद्भुतरामायण [अष्टम-
कर्तव्ये मूढतामाप ततः खेऽभूत्सरस्वती । राजन्गृहाण कन्यां त्वं पालयैनां महाप्रभाम् ॥ ३९ ॥ ज्वलनार्कसमां दिव्यां महत्कार्यं तवालये । भविष्यति महाभागा च क्षेमं जगतोऽनया ॥ ४० ॥
और कर्तव्यहीन होगये, तब आकाशसे सरस्वती (वाणी) हुई, हे राजन् ! तुम इसको ग्रहण कर कन्याके समान पालन करो ॥ ३९ ॥ इस अग्निके समान कान्तिमतीका तुम्हारे स्थानमें बडा कार्य होगा हे महाभाग ! इसके द्वारा जगत्का महामंगल होगा ॥ ४० ॥
यज्ञ संपाद्यतां राजन्नायं विघ्नस्तवानघ । नामास्याः किल सीतेति सीताया उत्थिता यतः ॥ ४१ ॥ कल्पयैना दुहितरमित्युक्त्वावाक् तिरोहिता । तच्छ्रुत्वा प्रीतिमान्राजा यज्ञं कृत्वा महाधनम् ॥४२॥
हे राजन् ! अपना यज्ञसंपादन करो यह विघ्न नहीं होगा, सीतासे उठनेसे इनका नाम सीता होगा ॥ ४१ ॥ इसे अपनी कन्या मानो, यह कह वाणि तिरोहित हुई; यह सुन प्रसन्न हो राजाने महाधनयुक्त यज्ञ सम्पादन किया ॥ ४२ ॥
जगाम सीतामादाय महर्षिभ्यश्च तां ददौ ॥ एतत्ते कथितं विप्र सीताजन्मैककारणम् । श्रुत्वैतत्सर्वपापेभ्यो मुक्तो भवति मानवः ४३
जनकदुहितृजन्म श्रावयित्वा तु श्रुत्वा न पुनरिह जन्म प्राप्नुयात्पुण्यवांश्च । दशरथसुतकांता तस्य गेहं कदाचिद्विसृजति नहि सर्वैः पातकैर्मुच्यते च ॥ ४४ ॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये अद्भुतोत्तरकाण्डे श्रीसीतो-
त्पत्तिर्नामाष्टमः सर्गः ॥ ८ ॥
और सीताको लेकर महर्षियोंको दिया, यह आपसे जानकीके जन्मका कारण कहा, इसके सुननेसे मनुष्य सब पापोंसे छूट जाता है ॥ ४३ ॥ जानकीके जन्मकी कथा सुननेसे फिर इस संसारमें जन्म नहीं होता है, प्राणी पुण्यवान् होता है, लक्ष्मी उसके घरसे नहीं जाती, तथा वह सब पापोंसे छूट जाता है ।४४।
इत्यार्षे श्रीमद्रा. वा. आ. भाषाटीकायां सीतोत्पत्तिर्नामाष्टमः सर्गः ॥ ८ ॥