अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
पृष्ठ 88, कुल 173 में से
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पंचदश सर्ग
हनुमान्जीका रामचन्द्रकी स्तुति करना
ध्यात्वा हृदिस्थं प्रणिपत्य मूर्ध्ना बद्धांजलिर्वायुसुतो महात्मा ॥
ओंकारमुच्चार्य विलोक्य देवमंतः शरीरे निहितं गुहायाम् ॥ १ ॥
रामं महात्मानम कुंठशक्तिं सनंदमुख्यैः स्तुतमप्रमेयम् ॥ पुष्टाव च
ब्रह्ममयैर्वचोभिरानंदपूर्णायितमानसः सन् ॥ २ ॥
वह महात्मा महावीरजी हृदयमें ध्यान कर शिरसे प्रणामकर हाथजोडकर ओंकारका उच्चारण देवको देखकर जो प्राणियोंके हृदय की गुहामें स्थित हैं ॥ १ ॥ राम महात्मा अकुंठशक्ति सनन्दादि मुख्योंसे स्तुतिको प्राप्त होते हुए, अप्रमेय भगवान्को आनन्दसे पूर्णमन होकर ब्रह्ममय वचनोंसे प्रसन्न स्तुति करने लगे ॥ २ ॥
त्वामेकमीशं पुराणं प्राणेश्वरं राममनन्तयोगम् ॥ नमामि सर्वान्तर-
सन्निविष्टं प्रचेतसं ब्रह्ममयं पवित्रम् ॥ ३ ॥ पश्यंति त्वां मुनयो
ब्रह्मयोनिं दांताः शांता विमलं रुक्मवर्णम् ॥ ध्यात्वात्मस्थमचलं स्वे
शरीरे कविं परेभ्यः परमं परं च ॥ ४ ॥
तुमही एक ईश पुरुष पुराण प्राणेश्वर अनन्तयोग सबके अन्तरमें स्थित हो, प्रचेतस पवित्र ब्रह्ममय पवित्रको नमस्कार करता हूँ ॥ ३ ॥ ब्रह्मयोनि आपको मुनिजन देखते हैं आप दान्त शान्त विगल रुक्मवर्ण हो, आत्मामें स्थित, परेसे परे तुमको महात्मा देखते हैं ॥ ४ ॥
त्वत्तःप्रसूता जगतःप्रसूतिः सर्वात्मसृष्टेः परमाणुभूतः ॥ अणो-
रणीयान्महतोमहीयांस्त्वामेव सर्वे प्रवदंति संतः ॥ ५ ॥ हिरण्यगर्भो
जगदंतरात्मा त्वत्तोऽधिजातः पुरुषः पुराणः ॥ स जायमानो भवता
विसृष्टो यथाविधानं सकलं ससर्ज ॥ ६ ॥
आपसे सारा जगत् उत्पन्न होता है, आप सर्वात्मा, सृष्टिके परमात्मा भूत हो, सूक्ष्म, बडेसे बड़े, आपको सन्त महात्मा कहते हैं ॥ ५ ॥ हिरण्यगर्भ जगत्के अन्तरात्मा आप पुराणपुरुषसे सब जगत् उत्पन्न होता है, विराटने -
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