भारतकोश
अध्यात्म रामायण

अध्यात्म रामायण

Adhyatma Ramayana

महर्षि वेदव्यास (टीकाकार: मुनीलाल) द्वारा

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दास-भक्त हनुमानजी

तथेति तस्यारुरोह स्कन्धं रामोऽथ लक्ष्मणः । उत्पपात गिरेर्मूर्ध्नि क्षणादेव महाकपिः ॥
(अ० रा० कि० १ । २८-२९)