अध्यात्म रामायण

अध्यात्म रामायण
Adhyatma Ramayana
महर्षि वेदव्यास (टीकाकार: मुनीलाल) द्वारा
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सदाप्रसन्न राम
सोऽयं परात्मा पुरुषः पुराणः एकः स्वयंज्योतिरनन्त आद्यः।
मायातनुं लोकविमोहनीयां धत्ते परानुग्रह एष रामः॥
(अ० रा० बाल० ५ । ४६)