अग्नि पुराण

अग्नि पुराण
Agni Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished878 पृष्ठ
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[ १० ]
| अध्याय विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ३४२- अभिनय और अलंकारोंका निरूपण ......... | ७११ | ३६६- क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ग ...................... | ८०३ |
| ३४३- शब्दालंकारोंका विवरण .......................... | ७१४ | ३६७- सामान्य नाम-लिङ्ग ................................. | ८०७ |
| ३४४- अर्थालंकारोंका निरूपण .......................... | ७२० | ३६८- नित्य, नैमित्तिक और प्राकृत प्रलयका वर्णन ..... | ८१० |
| ३४५- शब्दार्थोभयालंकार ................................. | ७२५ | ३६९- आत्यन्तिक प्रलय एवं गर्भकी उत्पत्तिका | |
| ३४६- काव्यगुण-विवेक ................................. | ७२७ | वर्णन .................................................. | ८११ |
| ३४७- काव्यदोष-विवेक ................................. | ७३० | ३७०- शरीरके अवयव ..................................... | ८१४ |
| ३४८- एकाक्षरकोष ........................................ | ७३२ | ३७१- प्राणियोंकी मृत्यु, नरक तथा पापमूलक | |
| ३४९- व्याकरण-सार ....................................... | ७३४ | जन्मका वर्णन ....................................... | ८१६ |
| ३५०- संधिके सिद्ध रूप ................................... | ७३५ | ३७२- यम और नियमोंकी व्याख्या; प्रणवकी महिमा | |
| ३५१- सुबन्त-सिद्ध रूप ................................... | ७३९ | तथा भगवत्पूजनका माहात्म्य ..................... | ८१९ |
| ३५२- स्त्रीलिङ्ग शब्दोंके सिद्ध रूप ...................... | ७५३ | ३७३- आसन, प्राणायाम और प्रत्याहारका | |
| ३५३- नपुंसकलिङ्ग शब्दोंके सिद्ध रूप ................. | ७५५ | वर्णन .................................................. | ८२१ |
| ३५४- कारक-प्रकरण ................................... | ७५६ | ३७४- ध्यान ................................................. | ८२२ |
| ३५५- समास-निरूपण ................................... | ७६१ | ३७५- धारणा ............................................... | ८२४ |
| ३५६- त्रिविध तद्धित-प्रत्यय ............................. | ७६३ | ३७६- समाधि .............................................. | ८२६ |
| ३५७- उणादिसिद्ध शब्दरूपोंका दिग्दर्शन ................ | ७७१ | ३७७- श्रवण एवं मननरूप ज्ञान ......................... | ८२८ |
| ३५८- तिङ्विभक्त्यन्त-सिद्ध रूपोंका वर्णन ............ | ७७५ | ३७८- निदिध्यासनरूप ज्ञान .............................. | ८३० |
| ३५९- कृदन्त शब्दोंके सिद्ध रूप ......................... | ७७९ | ३७९- भगवत्स्वरूपका वर्णन तथा ब्रह्मभावकी | |
| ३६०- स्वर्ग-पाताल आदि वर्ग ............................ | ७८१ | प्राप्तिका उपाय ....................................... | ८३१ |
| ३६१- अव्यय-वर्ग ......................................... | ७८८ | ३८०- जडभरत और सौवीर-नरेशका संवाद-अद्वैत | |
| ३६२- नानार्थ-वर्ग .......................................... | ७९१ | ब्रह्मविज्ञानका वर्णन ................................. | ८३३ |
| ३६३- भूमि, वनौषधि आदि वर्ग .......................... | ७९४ | ३८१- गीता-सार ............................................ | ८३७ |
| ३६४- मनुष्य-वर्ग .......................................... | ७९९ | ३८२- यमगीता .............................................. | ८४१ |
| ३६५- ब्रह्म-वर्ग ............................................. | ८०२ | ३८३- अग्निपुराणका माहात्म्य ............................ | ८४३ |
चित्र-सूची
सादे
| चित्र | पृष्ठ | चित्र | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| १- वक्ता व्यास, श्रोता सूत .................................... | ६ | १२- भगवान् ब्रह्मा .......................................... | २४० |
| २- वक्ता वसिष्ठ, श्रोता व्यास-शुकदेव ........................ | ६ | १३- अष्टभुज विष्णु .......................................... | २४० |
| ३- वक्ता अग्निदेव, श्रोता वसिष्ठ .............................. | ६ | १४- त्रैलोक्यमोहन श्रीहरि ................................. | २४० |
| ४- वक्ता नारद, श्रोता वाल्मीकि .............................. | ६ | १५- विश्वरूप विष्णु .......................................... | २४० |
| ५- हरि हर भगवान् ......................................... | १०१ | १६- श्रीलक्ष्मीजी ............................................. | ३५७ |
| ६- स्कन्दस्वामी .............................................. | १०१ | १७- श्रीसरस्वतीजी .......................................... | ३५७ |
| ७- चण्डी-बीसभुजा ........................................ | १०१ | १८- श्रीगङ्गाजी ............................................... | ३५७ |
| ८- दुर्गा-अठारहभुजा ....................................... | १०१ | १९- श्रीयमुनाजी ............................................. | ३५७ |
| ९- संध्यादेवी-प्रातःकाल ................................... | १४० | इनके अतिरिक्त पञ्चशलाका-वेध, राहुचक्र, सर्पाकार | |
| १०- संध्यादेवी-मध्याह्न ................................... | १४० | राहु, नरचक्र, रक्षायन्त्र-रेखाचित्र तथा कई चक्र-सम्बन्धी | |
| ११- संध्यादेवी-सायंकाल .................................. | १४० | कोष्ठक लेखोंके बीच-बीचमें दिये गये हैं। |