अग्नि पुराण
Agni Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 255, कुल 878 में से
संदर्भ में पढ़ें२२८ * अग्निपुराण *
ब्रह्माजी तथा ईशके मध्यवर्ती कोष्ठकोंमें जो दो पद हैं, उनमें ‘आप’की तथा नीचेवाले दो पदोंमें ‘आपवत्स’की पूजा करे। इसके बाद छः पदोंमें मरीचिकी अर्चना करे। मरीचि और अग्निके बीचमें जो कोणवर्ती दो पद हैं, उनमें सविताकी स्थिति है और उनसे निम्नभागके दो पदोंमें सावित्र तेज या सावित्रीकी। उसके नीचे छः पदोंमें विवस्वान् विद्यमान हैं। पितरों और ब्रह्माजीके बीचके दो पदोंमें विष्णु-इन्दु स्थित हैं और नीचेके दो पदोंमें इन्द्र-जय विद्यमान हैं, इनकी पूजा करे। वरुण तथा ब्रह्माके मध्यवर्ती छः पदोंमें मित्र-देवताका यजन करे। रोग तथा ब्रह्माके बीचवाले दो पदोंमें रुद्र-रुद्रदासकी पूजा करे और नीचेके दो पदोंमें यक्ष्मकी। फिर उत्तरके छः पदोंमें धराधर (पृथ्वीधर)-का यजन करे। फिर मण्डलके बाहर ईशानादि कोणोंके क्रमसे चरकी, स्कन्द, बिदारीविकट, पूतना, जम्भ, पापा (पापराक्षसी) तथा पिलिपिच्छ (या पिलिपित्स) — इन बालग्रहोंकी पूजा करे॥ ९-१३॥
इक्यासी पदोंसे युक्त वास्तुचक्र
| ईशान<br>चरकी | पूर्व<br>इन्द्र<br>स्कन्द | अग्नि<br>बिदारी | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १<br>ईश | २<br>(पर्जन्य)<br>घन | ३<br>(जयन्त)<br>जय | ४<br>(इन्द्र)<br>शक्र | ५ अर्क<br>(आदित्य<br>या सूर्य) | ६<br>सत्य | ७<br>भृश | ८<br>व्योम<br>(आकाश) | ९<br>हव्यवाह<br>(अग्नि) |
| ३२<br>दिति | ३३<br>आप | आप | मरीचि | मरीचि | मरीचि | सविता | ३४<br>सविता | १०<br>पूषा |
| ३१<br>अदिति | आपवत्स | ४४<br>आपवत्स | मरीचि | ३७<br>मरीचि | मरीचि | सावित्री | ३८<br>सावित्री | ११<br>वितथ |
| ३०<br>गिरि(शैल)<br>या ऋषि | पृथ्वीधर | पृथ्वीधर | विवस्वान् | विवस्वान् | १२<br>सोम<br>(गृहक्षत) | |||
| २९<br>सोम | पृथ्वीधर | ४३<br>पृथ्वीधर | ४५<br>ब्रह्मा | ३९<br>विवस्वान् | विवस्वान् | १३ कृतान्त<br>(धर्मराज<br>या यम) | ||
| २८<br>भल्लाट | पृथ्वीधर | पृथ्वीधर | विवस्वान् | विवस्वान् | १४<br>गन्धर्व | |||
| २७<br>मुख्य | रुद्र-<br>रुद्रदास | ४२<br>रुद्र-<br>रुद्रदास | मित्र | ४१<br>मित्र | मित्र | ४०<br>विष्णु-इन्दु | विष्णु-इन्दु | १५<br>भृङ्ग या<br>भृङ्गराज |
| २६<br>अहि<br>(नाग) | ३६<br>यक्ष्म | यक्ष्म | मित्र | मित्र | मित्र | इन्द्र-जय | ३५<br>इन्द्र-जय | १६<br>मृग |
| २५<br>रोग | २४<br>यक्ष्मा<br>(पापयक्ष्मा) | २३<br>शेष या<br>शोष | २२<br>दैत्य<br>(असुर) | २१<br>वरुण | २०<br>पुष्पदन्त | १९<br>सुग्रीव | १८<br>द्वारपाल<br>(दौवारिक) | १७<br>पितर |
| पापा (पापराक्षसी)<br>वायु | जम्भ<br>वरुण | पूतना<br>निर्ऋति |
पार्श्व-निर्देश:
- उत्तर / पिलिपिच्छ (पिलिपित्स) / सोम (कुबेर) (वाम पार्श्व)
- कन्दर्प (विकट) / दक्षिण (यम) (दक्षिण पार्श्व)