ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ
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१४२ [ दूसरी पञ्चिका यजमान की जड़ खोदना चाहे वह "चुपचाप की प्रार्थना" न पढ़े क्योंकि इसके न पढ़ने से यज्ञ बिना जड़ के हो जाता है और यजमान यज्ञ के साथ ही नष्ट हो जाता है। इस पर कहते हैं कि होता को यह प्रार्थना पढ़नी ही चाहिये। यह ऋत्विज् के लाभ के लिये है, जो "तूष्णीं शंस" पढ़ी जाती है। ऋत्विज् में ही यज्ञ प्रतिष्ठित है। और यज- मान यज्ञ में प्रतिष्ठित है। इसलिये "चुपचाप प्रार्थना" पढ़नी चाहिये। (८) ऐतरेय ब्राह्मण की दूसरी पञ्चिका का चौथा अध्याय समाप्त