भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 157, कुल 592 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 157

पाँचवाँ अध्याय ३३—आज्य शस्त्र के तीन भागों में से "आहाव" नामी पहला ब्राह्मण है। "निविद्" नामी दूसरा क्षत्रिय है। "सूक्त" ० नामी तीसरा वैश्य है। आहाव के बाद निविद् को कह कर होता ब्राह्मण को क्षत्रिय से मिला देता है। 'सूक्त' से पहले निविद् को कहकर क्षत्रिय से वैश्य को मिला देता है। यदि होता यजमान को क्षत्ररहित करना चाहे तो निविद् के मध्य में सूक्त कह दे। ऐसा करने से वह उसको क्षत्र-रहित कर देता है। यदि होता चाहे कि यजमान को वैश्य-रहित कर दे तो सूक्त के मध्य में निविद् कह दे। ऐसा करने से वह यजमान को वैश्य-रहित कर देता है। अगर चाहे कि यजमान को ठीक ठीक सब वर्णों से मुक्त रक्खे तो पहले आहाव कहे, फिर निविद्, फिर सूक्त। यही ठीक ठीक क्रम है। पहले अकेला प्रजापति ही था। उसने चाहा कि बहुत हो जाऊँ। उसने तप तपा। उसने मौन धारण कर लिया। एक ( १४३ )