ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 177, कुल 592 में से
संदर्भ में पढ़ेंपहला अध्याय ] १६३ यहां प्रश्न करते हैं कि क्या होता यजमान के लिये पाप या भद्र कर सकता है ? इसका उत्तर यह है कि जो जिसका होता होता है वह उसके लिये जो चाहे कर सकता है । यदि वह चाहे कि यजमान को प्राणों से वंचित करदे तो वायु के मंत्रों में गड़बड़ कर दे या एक पद छोड़ दे जिससे मंत्रों में गड़बड़ हो जाय । बस यजमान प्राणों से वंचित हो जायगा । यदि वह चाहे कि यजमान को प्राण और अपान से वंचित कर दे तो इन्द्र-वायु के मंत्रों में गड़बड़ करदे या एक पद छोड़ दे जिससे मंत्रों में गड़बड़ हो जाय । बस यजमान प्राण और अपान से वंचित हो जायगा । अगर चाहे कि आंख से उसे वंचित कर दे तो मित्र-वरुण के मंत्रों में गड़बड़ कर दे या एक पद छोड़ दे जिससे मंत्रों में गड़बड़ हो जाय । बस यजमान आंख से वंचित हो जायगा । अगर चाहे कि कान से उसे वंचित कर दे तो अश्विनों के तीन मंत्रों में गड़बड़ कर दे या एक पद छोड़ दे जिससे मंत्रों में गड़बड़ हो जाय । बस यजमान कान से वंचित हो जायगा । अगर चाहे कि उसे वीर्य से वंचित करदे तो इन्द्र के तीन मंत्रों में गड़बड़ कर दे या एक पद छोड़ दे जिससे मंत्रों में गड़- बड़ हो जाय । बस यजमान वीर्य से वंचित हो जायगा । अगर चाहे कि उसको अंगों (हाथ पैर) से वंचित कर दे तो विश्वेदेवों के मंत्रों में गड़बड़ कर दे या एक पद छोड़ दे जिस से मंत्रों में गड़बड़ हो जाय । बस यजमान अंगों से वंचित हो जायगा । अगर वह चाहे कि उसे वाणी से वंचित करदे तो सरस्वती के मंत्रों में गड़बड़ कर दे या एक पद छोड़ दे जिससे मंत्रों में गड़बड़ हो जाय और यजमान वाणी से वंचित हो जायगा ।