ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंदूसरा अध्याय ] ३०३ सविता का निविद् सूक्त यह है :— उदुष्य देवः सविता दमूना हिरण्यपाणिः प्रतिदोषमस्थात् । अयो हनूर्यजतो मन्द्रजिह्व आदाशुषे सुवति भूरिवामम् ॥ ( ६।७१।४-६ ) इसमें 'दाशुषे सुवति भूरिवामम्' इस वाक्य में 'वाम' शब्द पड़ा है । यह पशु रूप है । पांचवें दिन का यही रूप होता है । द्यावापृथिवी का निविद् सूक्त है । मही द्यावापृथिवी इहज्येष्ठे ( ४।५६ ) इसमें 'ऋवृद्धोता' शब्द आया है । ऋवृद्धोता प्रथमानेभिरेवैः ( ४।५६।१ ) यह पशु रूप है । यह पांचवें दिन का रूप है । ऋभुओं का निविद् सूक्त यह हैं । ऋभुर्विभ्वा वाज इन्द्रो नो अच्छ ( ४।३४ ) पशु वाज हैं । यह पशु रूप है। यह पांचवें दिन का रूप है । स्तुषे जनं सुव्रतं नवासीभिः······( ६।४९।१ ) यह वैश्वदेव का अध्यास है । यह पशु रूप है । यह पांचवें दिन का रूप है । अग्नि-मारुत् शस्त्र का प्रतिपद् यह है :— हविष्पान्तमजरं स्वर्विदि दिविस्पृश्याहुतं जुष्टमग्नौ । तस्य भर्मणे भुवनाय देवा धर्मणे कं स्वधया पप्रथन्त ॥ ( ऋ० १०।८८।१ ) 'हविष्मत्' पांचवें दिन का रूप है । मरुतों का निविद् सूक्त यह है :— वपुर्नु तच्चिकितुषे चिदस्तु । ( ऋ० ६।६६।१ ) इसमें वपु शब्द आया है । यह पांचवें दिन का रूप है । धाय्या वही है...जातवेदसे सुनवाम सोमम् । अग्निहोता गृहपतिः स राजा विश्वा वेद जनिमा जातवेदाः । देवा- नामुत यो मर्त्यानां यजिष्ठः स प्र यजतामृतावा ॥ ( ऋ० ६।१५।१३ ) यह जातवेद का अध्यास पशुरूप है । यह पांचवें दिन का रूप है । ( ३ )