भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 368, कुल 592 में से

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३५४ [ पाँचवीं पञ्चिका ( भूः । इन्द्र वाले होकर स्तुति करो । ) दोपहर के सवन में कहे :— “भुवः । इन्द्रवंतः स्तुध्वम्” तीसरे सवन में कहे :— “स्वः । इन्द्रवंतः स्तुध्वम्” ऊक्थ्य या अतिरात्र में कहे :— “भूर्भुवः स्वः । इन्द्रवंतः स्तुध्वम्” अगर ब्रह्मा कहे, “इन्द्रवंतः स्तुध्वम्”, इसका अर्थ है कि इन्द्र का यज्ञ है। इंद्र यज्ञ का देवता है। 'इन्द्रवन्त' कह कर ब्रह्मा उद्गीथ को इन्द्रवाला करता है। अर्थात् “इन्द्र से मत अलग हो । इन्द्रवाले होकर स्तुति करो”। वह ऐसा कहता है। (९) ऐतरेय ब्राह्मण की पाँचवीं पञ्चिका का पाँचवाँ अध्याय समाप्त हुआ। ऐतरेय ब्राह्मण की पाँचवी पञ्चिका समाप्त हुई।

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