ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 447, कुल 592 में से
संदर्भ में पढ़ेंतीसरा अध्याय ] ४३३ बताई। इसी प्रकार अभिषेचन के दिन उसने पशु के बदले पुरुष को बलि किया। (३) १६-इस यज्ञ में विश्वामित्र होता था, जमदग्नि अध्वर्यु, वसिष्ठ ब्रह्मा, अयास्य उद्गाता। आरम्भ करने पर कोई ऐसा आदमी न मिला जो उसको बाँधता। सुयवस के पुत्र अजीगर्त ने कहा, "मुझे सौ गायें और दो। मैं उसको बाँधूँगा"। उसको सौ गायें और दीं। और उसने बाँध दिया। आप्री मन्त्रों का पाठ हो गया और अग्नि की परिक्रमा भी हो गई। अब उसको बध करने वाला कोई न मिला। तब सुयवस के पुत्र अजीगर्त ने कहा, "मुझे सौ गायें और दो। मैं उसका बध कर दूँगा"। उसको सौ गायें और दी गईं और वह बध करने के लिये तलवार तेज करने लगा। शुनःशेप ने देखा कि यह मुझे ऐसे मार रहे हैं मानों मैं आदमी ही नहीं हूँ। मैं अब देवताओं के पास दौड़ूँ। वह देवताओं में सबसे पहले प्रजापति के पास गया। और यह ऋचा पढ़ी :- कस्य नूनं कतमस्यामृतानाम्......(ऋ० १।२४।१) इस प्रकार पूजा करते हुये उसको प्रजापति ने कहा, "अग्नि देवों में सब से निकट है। तू उसके पास जा"। अब वह इस मंत्र से अग्नि के पास गया:- अग्नेर्वयं प्रथमस्यामृतानाम्......(ऋ० १।२४।२) इस प्रकार पूजा करते हुये उससे अग्नि ने कहा, "प्राणियों का स्वामी सविता है उसके पास जाओ।" अब नीचे के तीन मन्त्रों से सविता के पास गया:- अभित्वा देव सवितः......(३) यश्चिद्धित इत्या......(४) भगभक्तस्य ते......(५) (ऋ० १।२४।३-५) २८