भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 454, कुल 592 में से

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पृष्ठ 454

चौथा अध्याय १९. प्रजापति ने यज्ञ रचा। यज्ञ रचकर ब्रह्म और क्षत्र हुये। ब्रह्म और क्षत्र के पीछे दो प्रकार की प्रजा हुई, एक हुताद् (यज्ञ शेष को खाने वाले) और दूसरे अहुताद् (यज्ञ शेष को न खाने वाले)। ब्रह्म हुताद् हुये और क्षत्र अहुताद्। जो ब्राह्मण हुये वह हुताद् हुये और जो क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र हुये वह अहुताद्। यज्ञ उन दोनों से भागा। ब्रह्म और क्षत्र ने उनका अनुसरण किया। जो ब्रह्म के आयुध थे उनको ब्रह्म ने लिया और जो क्षत्र के आयुध थे उनको क्षत्र ने लिया। जो यज्ञ के आयुध हैं, वही ब्रह्म के आयुध हैं। क्षत्र के आयुध यह हैं—घोड़ा, रथ, कवच, बाण, धनु। क्षत्र ने यज्ञ का पीछा तो किया पर कर न सका, इसलिये लौट आया क्योंकि क्षत्र के आयुधों से डर कर यज्ञ का पीछा किया और पा लिया। ब्रह्म यज्ञ को मार्ग में घेर ( ४४० )

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