भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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पृष्ठ 476

दूसरा अध्याय ५—अब जिस क्षत्रिय ने दीक्षा ली है और जिसको नया छत्र प्राप्त हुआ है उसके पुनरभिषेक का प्रश्न है। अवभृथ स्नान और पशुबंध्य कृत्य के पश्चात् अन्तिम इष्टि की जाती है। इष्टि की समाप्ति पर पुनरभिषेक होता है। इसका सामान पहले से ही तैयार होता है। उदुंबर की लकड़ी का तख्त हो। उसके पाये प्रादेश मात्र (अंगूठे और उसके पास की उंगली के बीच के स्थान के बराबर) हों। आधे हाथ के शीर्ष हों, मूंज के बंधन हों, तख्त पर बिछाने के लिये शेर का चमड़ा हो, उदुंबर का चमसा हो, उदुंबर की शाखा हो। उस उदुंबर के चमसे में आठ चीजें हों :—दही, शहद, घी, धूप में बरसने वाला मेंह का पानी, शष्प, तोक्म (जौ के पौधे), सुरा और दूर्व। स्फ्या से लकीर खींचकर दक्षिण की ओर तख्त रखते हैं। और उसका आगे का भाग पूर्व की ओर होता है। उसके दो पाये ( ४६२ )