भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

पृष्ठ 501, कुल 592 में से

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पाँचवाँ अध्याय २४-अब पुरोहित के विषय में कहते हैं। देव उस राजा का अन्न नहीं खाते जिसके पुरोहित न हो। इसलिये यज्ञ की इच्छा करने वाला राजा पुरोहित को नियुक्त करे। 'देव मेरे अन्न को खावें' ऐसा सोचकर राजा पुरोहित को नियुक्त करके स्वर्ग को ले जाने वाली अग्नियों को स्थापित करे। पुरोहित उसका आहवनीय है। स्त्री गार्हपत्य है। पुत्र आन्वा- हार्यपचन या दक्षिणाग्नि है। जो कुछ वह पुरोहित के लिये करता है मानो आहवनीय में यज्ञ करता है। और जो स्त्री के लिये करता है मानों गार्हपत्य अग्नि में यज्ञ करता है। और जो पुत्र के लिये करता है मानों दक्षिणाग्नि में यज्ञ करता है। ये अग्नियाँ शांततनु ( विघ्न नाशक ) होकर पुरोहित से पूजी जाकर और यजमान से प्रसन्न होकर उसको स्वर्गलोक में ले जाती हैं। और क्षत्र, ( ४८७ )

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