भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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( ५५९ ) ३३८, ३४५, ४०४ पृष्ठ १८४, २५१, २६५, २६६, २६६, २७४, २८५, ३०६, ३१६, ३३२, ३६४, ४५७ पृष्टि २४६; षडह २४६, ३३६ पोता ३७०, ३७१, ३७३, ३७४, ३७५, ४११ पोत्रीय ऋतुयाज २२१ प्रउग शस्त्र १४६, १५६, १६१, १६२, २०७, २६७, २७३, २८२, २६०, २६८, ३०६, ३१६, ३२१, ३२६ प्रगाथ १७७, १७८, १८७, २०१, २७३, ३७६, ३८५, ३८६, ३६०, ३६५, ब्राह्मणास्पति का १७७, २६८, २७४, २८४, मरुत्वतीय १८०, १८३, २७४, २८५; इन्द्र का २३६, बार्हत २३६, वरुणं का २३६, मैत्रावरुण २४०, इन्द्र निहव २७३, २८४, साम २७५, २८५, ३०१, ३१०, ३१६, ३२५ ( देखो साम प्रगाथ ) प्रगाह विधि ३६६; ४०० प्रजापति २०, २१, ३५, ४३, ४६, ७८, ८१, ८५, ११७, ११८, ११९, १२०, १२२, १४३, १५०, १५२, १५३, १७४, १८३- १८५, १६४, १६५, १६८, २०१, २०२, २५७, २५८, २६०, २६१, २६३, २६४, ३०१, ३०४, ३३६, ३४१, ३४४, ३५०, ३५१, ३५८, ३७२, ३८३, ३८५, ३८६, ३६४, ४१५, ४३३, ४४०, ४७६, और उत्पत्ति ३५०, ३५१, और दुहिता १६८, १६६, का मन्त्र २०५, और सूर्या २३५ प्रजापतेस्तनुः मंत्र ३४०, ३४१ प्रजावान् प्राजापत्य ५७ प्रयोतृ ऋचा ३६४ प्रतिगरिता ४३६ प्रतिपद तृच् १७८

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