ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ५६ ) स्रुव टूट जाय तो ४१६, गार्हपत्याग्नि बुझ जाय तो ४१६, अग्नि ले ले तो ४१७, गार्हपत्य और आहवनीय अग्नियां मिल जायं तो ४१७, ४१८, अग्नियां गाँव की अग्नि के साथ जल उठें तो ४१८ दिव्य अग्नि से अग्नियां मिलें तो ४१८, शव की अग्नि से मिलें तो ४१६, हवि पर आँसू बहे तो ४१६, व्रत विरुद्ध कार्य्य हो तो ४२०, अमा० या पूर्ण० यज्ञ छूट जाय तो ४२०, अग्नियां बुझ जायें तो ४२०, बिना आहुति दे अन्न खाले तो ४२१, कपाल टूट जाय तो ४२१, पवित्रता खो जाय तो ४२१, हिरण्य खो जाय तो ४२२, स्नान बिना अग्निहोत्र करे तो ४२२, सूत का स्त्री का पकाया खा ले तो ४२२, मरा बताना सुने तो ४२३, गाय जुड़वाँ बच्चा दे तो ४२३ प्रासहस्पति १८४, १८५ प्रैषमंत्र १६६ प्रोक्षणी ३४५ प्लाक्ष ४४६, ४५०, ४७६ बर्हि १६, ६६, १२६, ३४५, ३४६ बहिष्पवमानस्तोत्र १२६, यज्ञ १३०, सूक्त १५६ वाभ्रव मंत्र ४३६ बार्हत प्रगाथ २३६, २४० बार्हत दिन २७४, २६३ बृहती छन्द २६, १२१, १७५, १७८, २२७; २३८-२४१, २५६, २६०, २६८, ३६५, ३६६, ४१२, ४६३, ४६४ बृहत् ३१६, ३४८, ४५६, ४८० बृहत् छन्द ३०६, ३२६, देखो बृहती बृहत् दिवस २७५, २६३, २६४, ३१०, ३२५ बृहत् पृष्ठ २७४, ३१६, ३३२, ४५६, ४६० ३६