ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपाँचवाँ अध्याय सोम क्रय तथा अग्नि प्रणयन २७—सोम राजा गन्धर्वों के पास था। देवों और ऋषियों ने विचारा कि यह सोम राजा हम तक कैसे आवे । वाणी बोली कि गन्धर्व स्त्रियों को चाहते हैं। मैं स्त्री बन जाऊँगी तो तुम (सोम के बदले ) मुझे बेच देना। देवों ने कहा, "नहीं, हम तेरे बिना कैसे रहेंगे ?" उसने कहा, "मुझे उनके हाथ बेच दो। यदि तुम चाहोगे तो मैं तुम्हारे पास लौट आऊँगी।" उन्होंने ऐसा ही किया। और एक बड़ी नंगी स्त्री के रूप में उसे बेच कर सोम ले लिया। उसी के अनुकरण रूप में एक बछिया के बदले सोम मोल लिया जाता है। उस बछिया को फिर वापिस खरीद लेते हैं क्योंकि वह वाणी वापिस आ गई थी। इसीलिये (सोम खरीदने के बाद) मंत्र धीरे-धीरे बोलते हैं। क्योंकि सोम खरीदने पर वाणी गन्धर्वों के पास होती है। परन्तु अग्नि- प्रणयन के बाद वह फिर वापिस आ जाती है। (१) ( ७३ )