अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२७ अकबर बीरबल विनोद खने के लिये गया। बीरबल ने बागवान को हौज की चादर उठाने की आज्ञा दी। जब चादर उठा दी गई तो हौज एकदम पानी से भरा हुआ निकला उसमें दूध का लेश मात्र भी नहीं था। यह अजीब तमाशा देखकर बादशाह दंग हो गया और उसकी समझ में न आया कि आखिर मामला क्या है। जब बीरबल से उसका कारण पूछा गया तो वह बोला- "गरीबपरवर ! आपने अपनी आँखों देख लिया अब भी "सब सयानों का एक मत" वाली कहावत मानने को तय्यार हैं वा नहीं ? बादशाह ने सशंक होकर उत्तर दिया- "बीरबल कहावत तो अक्षरशः सत्य प्रतीत होती है, परन्तु फिर भी मैं पूर्णतया संतुष्ट नहीं हुआ हूँ अतएव इसमें और भी खोज बीन करने की आवश्यकता प्रतीत होती है। अब मैं उसका स्वयं अन्वेषण कर लूँगा तुम्हे कुछ करने की आवश्य- कता नहीं है। बीरबल तो हृदय से बादशाह का भक्त था इसलिये चुप रह गया। दूसरे दिन जब बादशाह सोकर उठा तो उसे वही बात वाली धुन समाई। वह अन्वेषण करने के अभिप्राय से भेष बदल कर नगर की तरफ चला। कई चक्कर काटने के बाद उसको एक मकान दृष्टिगत हुआ। इसकी दीवारें बहुत ऊँची न थीं और न कोई टीम टाम की सजावट ही थी, परन्तु मकान खूब साफ सुथरा था। बादशाह ने इसी मकान को अपने अन्वेषण का केन्द्र ठहराया और द्वार पर पहुँच कर मकान की घुन्डी खड़खड़ाइ । किवाड़ खुल गया। भीतर से