अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअकबर बीरबल विनोद १५० फिर पूछा-“वही वही क्या ? नाम क्यों नहीं बतलाते ।” बनिये बोले-“गरीबपरवर ! जो नाम अभी आपने बतलाया था वही ।” बादशाह भी पर में पानी लगने देने वाला नहीं था। उसने कहा-“अभी मैंने किस चीजका नाम लिया था ?” बनिये फिर चालाकी खेल गये और बोले-“गरीबपरवर ! हम को विस्मरण हो गया है।” बादशाह ने कहा-“हाँ हाँ मैंने मूँग का नाम बतलाया था ।” बनियों ने कहा-“जी जी, पृथिवीनाथ वही ।” इतना होने पर भी बनियों ने मूँग का नाम अपनी जबान पर न लाये। बादशाह उनकी इस चातुर्यता से अति प्रसन्न हुआ, और सब को घर जाने की अनुमति दी । गौ की महिमा एक दिन बादशाह के सामने लोग गौ की उपयोगिता पर विचार कर रहे थे; सभों ने गौ की एक से एक बढ़कर महिमा बतलाई। उस समय एक मौलबी साहब भी वहीं बैठे हुए थे, उन्होंने कहा-“गौ को मैं भी गुणवती कहने को तय्यार हूँ क्योंकि हमारी पुस्तकों में भी एक स्थान पर गौ के दूध को स्वास्थ्यवर्धक और मांस को अनिष्ट कर लिखा है।” यह सुनकर बीरबल से चुप न रहा गया, वह बोला-“तभी आप लोगों की कुरान के प्रारम्भ में ही बकर लिखा है। बकर गाय का नाम है। यह सुनकर सब लोग हँस पड़े, बादशाह भी प्रसन्न हुआ।