भारतकोश
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

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१५७ अकबर बीरबल विनोद कौन सा अच्छा एक दिन बादशाह अपने दर्बार में बैठा हुआ दर्बारियों से दिल-बहलाव की बातें कर रहा था, इसी दर्मियान बीरबल भी आ पहुँचा ! बादशाह ने बीरबल से पूछा- “बीरबल ! क्या बतला सकते हो कि फल कौन सा अच्छा? दूध किसका अच्छा, पत्ता किसका अच्छा, फूल कौन सा अच्छा, मिठास कौन सी अच्छी, राजा कौन अच्छा ?” उप- स्थित मण्डली में एक भी ऐसा न था जो ऊपर के प्रश्नों का उचित उत्तर देता । तब बादशाह ने इसका भार बीरबल के ऊपर दिया । बीरबल बोला-“पृथिवीनाथ ! फलों में बेटा अच्छा है जिससे बाप दादों का नाम पुस्त दरपुस्त चला जाता है । दूध माता का उत्तम होता है जिससे सब का पालन पोषण होता है । पत्ता पान का अच्छा होता है। इसके देने से नौकर स्वामिभक्त हो जाता है, यहाँतक कि उसके लिये प्राण तक न्योछावर करने को उद्यत हो जाता है। फूल कपास का अच्छा होता है कारण कि उसके सहारे संसार भर की लज्जा रहती है। मिठास वाणी की अच्छी होती है, जिसके फल- स्वरूप बिना पैसा कौड़ी के लोग वश में हो जाते हैं। राजाओं में इन्द्र महान है जो पानी बरसाकर जगत को पालता है।” बीरबल के ऐसे उत्तर से सब सभासदों के सहित बादशाह अति प्रसन्न हुए और बीरबल को कई बीघे भूमि जागीर दी ।