भारतकोश
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

पृष्ठ 242, कुल 292 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 242

अकबर बीरबल विनोद २२८ हाथ के स्पर्श किये फल तक भी किसी रंक का खाने को जी नहीं चाहता था। वह स्त्री गर्भिणी थी। यह देखकर बादशाह को बड़ा आश्चर्य हुआ और वे बीरबल से बोले- "बीरबल ! जरा कामदेव का प्रबल प्रभाव तो देखो ! जिसके देखने मात्र से घृणा उत्पन्न होती है, उसके साथ रमण करनेवाला भला कैसा होगा ?" बीरबल ने उत्तर दिया-"पृथिवीनाथ ! भूखे को जूठा मीठा नहीं सूझता। निद्रा देवी के आवाहन के समय मुलायम सेज वा जमीन का विचार नहीं उठता। उसी प्रकार कामकी ज्वाला के सामने भी भले बुरे का परिज्ञान भूल जाता है। उस समय काम से पीड़ित व्यक्ति को न जात सूझता है न कुजात। आपको अन्वेषण करने पर ऐसे बहुतेरे पुरुष मिलेंगे जो देखने में तो बड़े सुन्दर और फिटिक बाज होंगे, परन्तु ऐसी २ गलीज जगहों में उन्हीं का नम्बर निकलता है।" बादशाह ने कहा-"हाँ तुम्हारा कहना भी सत्य हो सकता है। इसलिये मैं चाहता हूँ कि इससे रमण करने वाले की खोज की जाय। मैं उसे देखना चाहता हूँ। बीरबल बोला- "शायद कुछ देर अगल बगल के लोगों से पूछताछ करने पर कुछ भेद खुले। ऐसा विचार कर वे वहाँ से कुछ दूर निकल गये, परन्तु बीरबलको उस बात की ही धुन बँधी रही। वह बराबर उसी स्त्री की तरफ लगा हुआ था। थोड़ी देर बाद एक ऐसी घटना घटी कि एक कामी पुरुष उसके बगल से होकर निकला और उस स्त्री से कुछ संकेत द्वारा कहकर आप आगे निकल गया। वह देखने में किसी उच्च कुल का जान पड़ता था, परन्तु