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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

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[Header] अकबर बीरबल विनोद २३८

कर मेरे सन्देह को मिटाकर इसकी पूर्ति करा दीजिये । रामायण में एक नायक और नायिका का प्रधान होना आव- श्यक है । नायक तो आप अकेले हैं । परन्तु आपके पास कई नायिकाएँ हैं । इसलिये इसमें किस बेगम को प्रधान मानकर नायिका बनाया जाय ।” बादशाह बोले-“प्रधान बेगम को ही इसकी नायका बनाओ ।” बीरबल पुस्तक को लिये दिये बड़ी बेगम के पास पहुँचा और उनसे कुशल प्रश्न के पश्चात् पूछा-“ रामायण की नायिका महारानी सीताजी को राक्षस राज रावण के घर रहना पड़ा था । इसलिये आप किसके घर रही हो ।” आपसे इसका उत्तर मिलने पर मैं शाही रामा- यण तय्यार कर डालूँगा ।” बीरबल की ऐसी बातें सुनकर बेगम सिर से पैर तक जल गईं और वे अपनी दासी को आज्ञा देकर उस रामायण को बीरबल के सामने ही जलवा दिया । बीरबल बेगम से बिदा होकर बादशाह के पास आया और बेगम के द्वारा चिढ़कर रामायण जलाये जाने का सारा किस्सा कह सुनाया। फिर हाथ जोड़कर बोला-“पृथ्वीनाथ ! शाही रामायण फिर भी तय्यार हो सकती है । यदि आप चाहते हों तो दूसरी आज्ञा दीजिये ।” बादशाह हँसते हुए बोले-“बीरबल जो कुछ होना था सो हो गया, अब दूसरी रामायण बनाने का कष्ट आपको नहीं दिया जायगा । महाराज रामचन्द्र समर्थ थे, मैं उनकी तुलना नहीं कर सकता । तो मैं यह पहले ही समझ चुका था मुझे तो केवल तुम्हारी परीक्षा लेनी थी । सो ले लिया । मैं भली