भारतकोश
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

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२७३ अकबल बीरबल विनोद

बीरबल ने एक चपरासी को भेजकर एक विख्यात वैद्य को बुलवाया, जब वह हाजिर हुआ तो बोला-"वैद्यजी ! इस स्त्री को ऐसी दवा खिलावो जिससे इसे वमन हो जावे । वैद्य ने वमन होनेकी एक गोली खिलाई, जिसके खानेके थोड़ी देर बाद ही उस स्त्री का खूब वमन हुआ । वमन का भली- भाँति निरीक्षण करने पर उसमें दूध रोटी के अतिरिक्त मांस का एक टुकड़ा भी नहीं निकला । इस दृश्य को देखने के साथ ही सबको उस स्त्री की पवित्रता पर विश्वास होगया । झूठा दोषारोपण के अपराध में पठान और सिपाही दोनों ही दण्डित किये गये । स्त्री को उसके पति के हवाले किया गया । बीरबल की इस अनुपम चातुर्य्यता का लोगोंपर गहरा प्रभाव पड़ा और वे एक स्वर से बीरबल की प्रशंसा करने लगे ।

खटिक और तेली एक दिन दिल्ली नगर के एक खटिक और तेली के अन्तर- गत कुछ विवाद खड़ा हो गया और वे आपस की लड़ाई को लेकर न्याय कराने के अभिप्राय से बीरबल के पास पहुँचे । तब बीरबल बोला- "आप लोगों में कौन वादी है और कौन प्रतिवादी । तेली अपने को वादी बतलाता और खटिक अपने को प्रतिवादी । बीरबल ने कहा-"अच्छी बात है । तुम लोग अपना ठीक ठीक हाल बयान करो ।" तेली ने कहा-"दीवान जी ! मैं अपनी एक छोटी सी दूकान अमुक महल्ले में रखता हूँ, एक दिन जब कि मैं अपनी दूकान पर बैठा माल खरीद

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