भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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माड़ोका युद्ध । १०७ ५६ मेढ़ा पावैं यहु बाबा जो तौ हम हरद्वार को जायँ ४४ यहुतो कैदी है बिजमाका मांगो और बस्तु कछु भाय ॥ जो हम पावैं यहु मेढ़ा ना तुम्हरो योग अकारथ जाय ४५ सुनिकै बातें ये योगिन की झिलमिल मेढ़ा दीन गहाय ॥ योगी बोले तब झिलमिल ते याको मानुष देव बनाय ४६ तबजलछिनक्योझिलमिलतापर मानुष भयो लहुरवा भाय ॥ चलिकै बाहर भे मढ़ियाते बोल्यो तुरत उदयसिंहराय ४७ मारो दादा यहि योगी को तौ सब काम सिद्ध ह्वैजायँ ॥ सुनिकै बातें ये ऊदन की लौटा तुरत बनाफरराय ४८ मूड़ काटिकै फिरि बाबाको औ मढ़ियामाँ दीन चलाय ॥ तीनों चलिभे फिरि तहँनाते औ लश्करमें पहुंचे आय ४६ खबरि सुनाई सब आल्हा को डंका तुरत दीन बजवाय ॥ बाजे डंका अह्रतंका के मारू शब्द रहे हहराय ५० लैके फौजैं राजाजम्बा पहुँचा समरभूमिमाँ आय ॥ बम्बके गोला छूटन लागे धुँवना रहा सरग में छाय ५१ जौने हाथी के गोला लागै मानो गिरा धौरहर आय ॥ जौने बछेड़ा के गोला लागै मानो गिरह कबूतर खाय ५२ जौने क्षत्री के गोला लागै यमपुर तुरत देय दिखलाय ॥ गोला लागै ज्यहि सँड़िया के सो मुँहभरा तुरत गिरि जाय ५३ जौने तम्बू गोला लागै त्यहिकोलिये सरग मड़राय ॥ गोली ओली सम बर्षत भईं मानो मघा दीन झरि लाय ५४ भाला बलछी खट खट बोलैं डोलैं तीनों तहाँ बयारि ॥ कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि कहूँकहूँ देखिपरे तलवारि ५५ तेगा चटकैं बर्दवान के कोता खानी चलैं कटार ॥