भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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८ आल्हखण्ड । १२४ मीराताल्हन के लरिका ये नाहर समरधनी तलवार ॥ मन्नागूजर मोहबे वालो सोऊ वेगि भयो असवार ७० सातलाख लग फौजैं सजिकै नैनागढ़ को भई तयार ॥ डंका बाजैं अहलंका के ऊदन बेंबुलपर असवार ७१ सजे बराती सब मोहबे के जल्दी कूच दीन करवाय ॥ सातरोज की मैजलि करिकै फौजैं अठीं धुरा पर आय ७२ आठ कोस नैनागढ़ रहिगा तहँपर डेरादीन डराय ॥ तम्बू गड़िगा तहँ आल्हा का बैठे सबै शूरमा आय ७३ ऊंचे ऊंचे तम्बू गड़िगे नीचे लागीं खूब बजार ॥ कम्भर छोरे राजपूतन ने हाथिन हौदा धरे उतार ७४ तंग बछेड़न की छोरी गईं क्षत्रिन धरा ढाल तलवार ॥ बनी रसोई राजपूतन की सबहिनजेंयलीन ज्यँवनार ७५ गा हरकारा तब तहँनाते जहँना भरीलाग दरबार ॥ बैठक बैठे सब क्षत्री हैं एकते एक शूर सरदार ७६ गम् गम् गम् गम् तबला गमकैं किन् किन् परी मँजीरन मार ॥ को गतिबरणै सारंगी कै होवै नाच पेतुरियन क्यार ७७ खये अफीमनके गोला कोउ पलकैं मूंदैं औ रहिजायँ ॥ कोऊ जमाये हैं भांगनको मनमाँ रहे रामयश गाय ७८ उड़ै तमाखू बुटवल वाली धुँवना रहा तहांपर छाय ॥ हाथ जोरि औ बिनती करिकै धावन बोल्यो शीशनवाय ७९ अईं बरातें क्यहु राजाकी धूरे परीं आजही आय ॥ आठकोस केहैं दूरीपर सांची खबरि दीन बतलाय ८० सुनिकै बातें नयपाली ने तीनों लड़का लये बुलाय ॥ जोगा भोगा औ बिजियाते राजा बोल्यो बचन सुनाय ८१