भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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२४ आल्हखण्ड । १४० भगैं सिपाही चौगिर्दा ते भारी होत चलै गलियार ११८ मन्नागूजर ऊजर कीन्हों देवै कठिन कीन तलवार ॥ को गति बरणै तहँ रुपनाकी रणमाँ भली मचाई मार ११९ पूरन राजा पटनावाला भाला लिये हनै दश पांच ॥ को गति बरणै तहँ भोगाकै घोड़ा ऊपर रहा सो नाच १२० हनि हनि मारै चौगिर्दा ते गरुई हाँक देय 'ललकार ॥ इतना सुनिकै मलखे ठाकुर तुरतै खैंचिलीन तलवार १२१ ऊदन बोले तब मलखे ते दादा मोहबे के सरदार ॥ सुनवाँ भौजी का भैया है आई मड़ये के त्यवहार १२२ इतना सुनिकै मलखे ठाकुर फ़ौजन तरफ पहूंचाय ॥ बहुतन मार्यो तलवारी सों बहुतनहन्यो ढालके घाय१२३ इतना कहिकै ऊदन चलिभे जोगा पास पहूंचे जाय ॥ जोगा बोला तब ऊदनते मानो कही बनाफरराय १२४ बड़ी दूरिते चलिआयो है आपनि लोह दिखावो आय ॥ सुनिकै बातें ऊदन बोले ठाकुर सत्य देयँ बतलाय १२५ मोरे मोहोबे में किरिया भै जो करि डरी चँदेलोराय ॥ कोऊ आवै समरभूमि में आपनिलोह दिखावैआय १२६ पहिले ल्वाहै वहिकी देखो पाछे आपनि देवदिखाय ॥ मारो मारो समर भूमि में नहिंशककरोमनैकछुभाय१२७ इतना सुनिकै जोगाठाकुर तुरतै लीन्ह्यो साँ ग उठाय ॥ मनाएक के सो अंदाजन ऊदन ऊपर दयोचलाय १२८ घोड़बेंदुला ऊपर उड़िगा नीचे सांगगिरी अरराय ॥ बचा बेंदुलाका चढ़वैया आल्हाकेर लघुरवाभाय १२६ ऊदन बोले फिरि जोगा ते दूसरि वार करो सरदार ॥