भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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आल्हाका विवाह । १४५ २६' देखि तमाशा द्वारपाल तहँ ऊदन निकट पहुंचे आय ॥ साथ तुम्हारे द्वै घोड़ा हैं औ असवार एक तुम भाय ३१ रूप तुम्हारो बयपारी को आयो कौन देश ते भाय ॥ घोड़ा लायेते काबुलते बेचे सबै कन्नौजै जाय ३२' एक इकेलो यह बाकी है राजै खबरि सुनावै जाय ॥ इतना सुनिकै द्वारपाल फिरि राजै दीन्ह्यो खबरि बताय ३३ खबरि पायकै अरिनन्दन फिरि द्वारे पौरि पहुंचे आय ॥ घोड़ पपीहा मोहबेवाला राजा देखिगये हरषाय ३४ राजा बोले बघऊदन ते याकी कीमति देवबताय ॥ ऊदन बोले अरिनन्दनते साँचे बचन देयँ बतलाय ३५ पहिले चढ़िकै यहि घोड़ेपर कोऊ ज्वान नचावै आय ॥ हाल देखिल्यो यहि घोड़ेका तब मैं कीमति देउँ बताय ३६' सुनिकै बातें सौदागरकी राजै हुकुम दीन फर्माय ॥ बैठै क्षत्री जो कोउ जावै घोड़ा टापन देय हटाय ३७ होय मोहबिया कोउ मोहबेका घोड़ा देखि सीध है जाय ॥ टेढ़े घोड़ेके चढ़वैया मोहबे बसैं बनाफरराय ३८ सुनिकै बातें सौदागरकी तुरतै आल्है लीन बुलाय ॥ हुकुम लगायो अरिनन्दनने घोड़ा बैठि नचावोभाय ३६' हुकुम पायकै अरिनन्दनको घोड़ा चढ़े बनाफरराय ॥ घोड़ नचायो भल आल्हाने ऊदन बोल्यो बचन सुनाय ४०' जल्दी चलिये अब लश्करको दादा काह रह्यो पछिताय ॥ नाम हमारो उदयसिंहहै ओ अरिनन्दन बात बनाय ४१ इतना कहिकै बघऊदनने आपन घोड़ दीन दौड़ाय ॥ आल्हौ चलिभे फिरिजल्दीसों लश्कर दोऊ पहुंचेभाय ४२' १०