आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमलखानका विवाह। १६५ ६ दिल्ली कनउज औ नैनागढ़ उरई न्यवत दीन पठवाय ॥ सिरउज पनउज औ बौरी में न्यवता भेजा चँदेलोराय ८२ पायके चिट्ठी परिमालिककै इनको मानि बड़ो ब्यवहार ॥ नगर मोहोबे के जानेको राजा होन लागि तय्यार ८३ बाजे डंका अहर्तका के राजन कूचदीन करवाय ॥ तेरस केरो शुभ मुहूर्त पढ़ मोहबे गये सबै नृप आय ८४ तम्बू गड़िगे महराजन के खातिर कीन उदयसिंहराय ॥ पढ़े पढ़ाये सब क्षत्री रहें अपने धर्म कर्म समुदाय ८५ उचित औ अनुचितके ज्ञातारहें जानैं राजनीति सब भाय ॥ देश आरिया यह बाजत है आर्य कहै बसिंदा जायँ ८६ आर्य ऊदन त्यहि समया में सबको खुशी कीन अधिकाय ॥ तुरत नगड़ची को बुलवायो तासों कह्यो हाल समुझाय ८७ बाजे डंका अब मोहवे माँ सबियाँ फौज होय तय्यार ॥ सुनिकै बातें ये ऊदन की डंका भजनलाग त्यहिबार ८८ मलखे आये फिरि महलन में होवन लाग तेल त्योहार ॥ एक कुमारी तेल चढ़ावै गावैं सबै मंगलाचार ८६ माय मन्तरा भे दूसरे दिन नहखुर समयगयो फिरिआय ॥ लैके महाउर नाइनि आई नहखुर करन लागि हर्षाय ६० जो कछु माँग्यो ज्यहि नेगी ने मल्हना दीन ताहिसमुझाय ॥ मनके भाय जब सब पाये नेगिन खुशी कहीनाजाय ६१ कुँवाँ बियाहन के समया में मलखे चढ़ पालकी धाय ॥ बिटिया मल्हना की चन्द्रावाले राई नोन उनारति जाय ६२ जायकै पहुंचे फिरि कुँवनापर बिरमा पैर दीन लटकाय ॥ भाँवरि घूम्यो मलखाने ने लीन्ह्यो माता पैर उठाय ६३