भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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३४ आल्हखण्ड । १६० पकरिकै बाहू दउ ऊदन की मलखे छाती लीन लगाय ॥ तीनों चलिभे फिरि खन्दकसों आल्हा निकट पहुँचे आय ४५ राजा बोल्यो फिरि आल्हा सों मानो कही बनाफराय ॥ कैदी छोड़ो दउ पुत्रन को अबहीं ब्याह लेउ करवाय ४६ ऊदन बोले फिरि राजाते तुम्हरी कौन 'करै परतीति ॥ गंगा करिकै दादै लैके घरमाँ किह्योजाय अनरीति ४७ दया आयगे फिरि आल्हाके गंगा फेरि लीन करवाय ॥ कैद छुड़ायो दउ पुत्रन को पण्डित तुरतै लीन बुलाय ४८ देखिपत्तरा पण्डित बोल्यो भाँवरि आजु लेउ करवाय ॥ इतना सुनिकै राजा चलिभा दोऊ पुत्रन साथ लिवाय ४६ आल्हा पहुंचे जनवासे में राजा महल पहुँचा जाय ॥ लिल्ली घोड़ी माहिल चढ़िकै राजा घरै गये फिरि धाय ५० बड़ी खातिरी राजा कीन्ह्यो माहिल बैठि महल में जाय ॥ माहिल बोले फिरि राजाते मानो कही बिसेनेराय ५१ जितने ठाकुर आल्हा घरके मड़येतरे लेउ बुलवाय ॥ शूर कुठरियन में बैठारो सबके मूड़लेउ कटवाय ५२ इतना कहिकै माहिल चलिभे पथरीगढ़ै पहुँचे आय ॥ किह्यो तयारी ह्याँ मड़ये की यहु गजराजा खंभ गड़ाय ५३ सूरज बेटा को बुलवायो तासों कह्यो हाल समुझाय ॥ सुनिकै बातैं सब राजा की सूरज चलिभा शीशनवाय ५४ जायकै पहुँच्यो जनवासे में जहाँ पर बैठि बनाफरराय ॥ कह्यो हकीकति सबआल्हासों सूरज बार बार शिरनाय ५५ सुनिकै बातें सब सूरज की आल्हा हुकुम दीन फर्माय ॥ आवै घोरैया सब मड़ये को यहु कहिदियो बिसेनेराय ५६