भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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मलखानका बिवाह । १६१ ३५ इतना सुनिके ऊदन देवा जोगा भोगा भये तयार ॥ मलखे सुलखे ब्रह्मा लाखनि इनहुन वांधिलीन हथियार ५७ चन्दनबेटा पृथ्वीराज को जगनिक भैने चँदेलो क्यार ॥ मोहनबेटा बीरशाह को बौरीगढ़ को जो सरदार ५८ हाथी सजिगा पचशब्दाफिरि आल्हा तापर भये सवार ॥ बारहु ठाकुर अपने अपने सबहिन बाँधिलियेहथियार ५६ कूच करायो जनवासे ते मड़ये तरे पहुंचे जाय ॥ चन्दन चौकी मलखे बैठे पण्डित साइति दियो बताय ६० घर औ कन्या इकठौरी भे भाँवरिसमय गयो नगच्याय ॥ पहिली भाँवरि के परतैखन सूरज ठाकुर उठा रिसाय ६१ वार चलाई सो मलखे पर ऊदन लीन्हो वार बचाय ॥ दूसरि भाँवरि के परतैखन कांतामलहू गयो रिसाय ६२ खैंचिकै मारा सो मलखेपर रोंका तुरत लहुरवाभाय ॥ तीसरि भाँवरि के परतैखन सबियाँ शूर पहुँचे आय ६३ बड़ी लड़ाई भै आँगन में तुरतै बही रकतकी धार ॥ मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लाग पहार ६४ आधे आँगन भौंरी होवैं आधे खूब चलै तलवार ॥ नाई बारी जी लैभागे जूझे बड़े बड़े सरदार ६५ को गति बरणै राजपूतन कै भारी हाँक देयँ ललकार ॥ चलै कटारी बूंदी वाली आँगन चमकिरही तलवार ६६ चन्दन मोहन लाखनि ऊदन दोऊ हाथ करैं तलवार ॥ को गति बरणै जगनायक कै भैने जौन चँदेले क्यार ६७ जोगा भोगा सुलखे देवा इनहुन खूब मचाई मार ॥ इतने क्षत्रिन के मारुन में कोउ न खड़ा होय सरदार ६८