भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 202, कुल 618 में से

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पृष्ठ 202

अथ आल्हखण्ड ॥ ब्रह्माका विवाह अथवा दिल्लीकी लड़ाई ॥ सवैया ॥ हैकर दीन गह्यों तुमको रघुनाथ करो अबतो रखवारी । पायके शाप पषाण भई मुनिनारि दयालु दियो तुम तारी ॥ हा राम कह्यो यवनो यकबार गयो तब धामहि वेगि खरारी । दीन पुकार करै ललिते प्रभु चूक क्षमो रघुनाथ हमारी १ सुमिरन ॥ पहिले सुमिरों पद गणेश के गौरा पारवती के बाल ॥ हाथी आनन सम आनन है सेंदुर सदा विराजै भाल १ बड़ी पियारी जिन दुर्वा है फूलो बड़े पियारे लाल ॥ भोग लगावै जो लड्डू को तापर खुशी रहें सब काल २ हैं शिवशङ्कर के लरिका ते अरिका करैं सदा जे नाश ॥ विधिवत पूजनजोकोउ कीन्हो पूरी सदा तासुकी आश ३ बड़ो भरोसो तिन गणेश को अपने हृदय करौ सब काल ॥ करो मनोरथ पूरण हमरो गौरा पारवती के लाल ४ छूटि सुमिरनी गै गणेशकै सुनिये बेला केर हवाल ॥

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