भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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ब्रह्माका विवाह । २०६ १३ पटा बनेटी बाना कहूँ कहूँ कहूँकहूँ गदका को घमसान ॥ बाढ़ि घरावैं कहूँ कहूँ क्षत्री कहूँकहूँ हँनैं निशाना जवान १३० देखि तमाशा चौंड़ा ताहर मनमें बड़े खुशी है जायें ॥ कूच कराये दउ मोहबे ते दिल्लीशहरगये नगच्याय १३१ ह्यौंसुधि पाई माहिल ठाकुर दिल्ली अटे अगाड़ी जाय ॥ माथनवायो जब माहिल ने खातिर कीन पिथौराराय १३२ सोने कि चौकी में बैठारयो राजा दिल्लीके महराज ॥ बोले पिरथी फिर माहिल ते तुम्हरोकौन करी हमकाज १३३ बोले माहिल फिर पिरथी ते मानो कही सत्य महराज ॥ ब्याहजो कीन्ह्यो तुम मोहबे में खोई सबै अपनी लाज १३४ जाति बनाफरकी ओछी है है सब जातिन केरि उतार ॥ इतना कहतै चौंड़ा ताहर दोऊ आयगये दरबार १३५ सूरति दीख्यो जब ताहर की गरई हाँक दीन ललकार ॥ हमजो वरजा तुमको ताहर ना तुम मानी कही हमार १३६ सुनिकै बातें ये राजा की ताहर हाथजोरि शिरनाय ॥ कही हकीकति सब मलखे की ताहर बारवार समुझाय १३७ माहिल बोले फिर राजा ते नाहर दिल्ली के सरदार ॥ टीका फेरो तुम जल्दी सों इतनी मानो कही हमार १३८ इतना सुनिकै चौंड़ा चलिभा ताहर बोले बचन उदार ॥ बड़े लड़ैया मोहबे वाले जिनके बाँट परी तलवार १३६ ब्याहन आवैं जब तुम्हरे घर तब तुम मूड़ लिह्यो कटवाय ॥ टीका फिरिहै अब दादा ना तुमते सत्यदीन बतलाय १४० यह मन भाय गई माहिल के तुरतै कीन्ह्यो रामजुहार ॥ बिदा माँगिकै पृथीराज सों चलिभा उरई का सरदार १४१ २४