आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मका विवाह । २१७ २१ हाथ जोरिकै महराजा को सब बारीके कहे हवाल ६९ सुनिकै बातें द्वारपाल की यहु महराज पिथौराराय ॥ सूरज लड़का को बुलवायो औ सबहाल कह्यो समुझाय ७० पकरिकै लावो त्यहि बारी को हमको बेगि दिखावो आय ॥ सुनिकै बातें महराजा की सूरज चलिभा शीशनवाय ७१ दीख दुआरेपर बारी को नाहर घोड़े पर असवार ॥ शंका जाके कछु नाहीं है हाथ म लिये नाँगि तलवार ७२ हुकुम लगावा द्वारपाल को फाटक बंद लेउ करवाय ॥ फिरि लयलकारा रजपूतन को लावो पकरि शूरमाँ जाय ७३ हुकुम पायकै तब सूरज को तुरतै चले सिपाही धाय ॥ ऍंड़ लगायो हरनागर के टापन क्षत्री दीन गिराय ७४ बहुतन मार्यो रूपनबारी हाहाकार शब्द गा छाय ॥ देखि तमाशा सूरज ठाकुर मनमाँ बार बार पछिताय ७५ रूपनबारी के मुर्चा माँ कोऊ शूर न रोँकै पायँ ॥ उड़न बछेड़ा हरनागर ने बहुतक क्षत्री दीन गिराय ७६ फिरि फिरि मारै औ ललकारै बारी बड़ा लड़ैया ज्वान ॥ देखि तमाशा यहुबारी का ताहर समरधनी चौहान ७७ सूरज ताहर दुउ शहजादे रूपन पास पहुंचे जाय ॥ ऍंड़ लगायो हरनागर के फाटकपार निकरिगा साय ७८ मारो मारो हल्ला कैकै क्षत्री सबै चले बिरझाय ॥ नेग लेब अब हम भौरिन में गरई हाँक दीन गुहराय ७९ इतना कहिकै ऍड़ लगायो फौजन तुरत पहुंचा आय ॥ जैसे फागुन फगुई खेलैं लोहू छीटन गयो अन्हाय ८० तैसे दीख्यो जब रूपन का बोल्यो उदयसिंह सरदार ॥