भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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[Header] ब्रह्माका बिवाह । २१६ २३

जहर घुरावो तुम शरबत में औ लशकरमें देउ पठाय ६३ बिना बयारी जूना टूटे औ बिन औषधि बहै बलाय ॥ यहै तयारी अब करिदारो तौ सबकाम सिद्ध है जाय ६४ साम दाम औ दण्ड भेद सों क्षत्री करें आपनो काम ॥ छल बल क्षत्री का धर्म है तुमको कौन करै बदनाम ६५ बातें सुनिकै ये माहिल की भा मन बड़ा खुशी नरनाह ॥ स्याबासि स्याबासि उरई वाले हमका नीकि दीन सलाह ६६ बिदा मांगिकै पृथीराज सों तम्बुन फेरि पहुंचा आय ॥ हाल बतायो परिमालिक को चेउँ न करी पिथौराराय ६७ जैसे पियासा पानी पावै सूखे धान परै जस नीर ॥ बातें सुनिकै ये माहिल की तैसे आय गयो मनधीर ६८ घड़ा मँगायो ह्वाँ पिरथी ने तामें जहर दीन डरवाय ॥ चारो नेगिन को बुलवायो सूरज पूत लीन बुलवाय ६६ कह्यो हकीकति सब सूरज सों पिरथी बार बार समुझाय ॥ तुरत कहारन को बुलवायो सूरज घड़ा लीन उठवाय १०० माथनायकै फिरि पिरथी को मनमें श्रीगणेश पद ध्याय ॥ सूरज चलिभा फिरि दिल्ली सों लश्कर तुरत पहुंचा आय १०१ जहँना तम्बू परिमालिक का बहिँगी तहाँ दीन धरवाय ॥ माथ नायकै परिमालिक को आपो बैठिगयो तहँ जाय १०२ मलखे बैठे हैं दहिने पर बायें बैठ उदयसिंहराय ॥ बैठ बराबर आल्हा ठाकुर शोभाकही बूत ना जाय १०३ सूरज बोले तहँ राजा सों शरबंत आप देउ बँटवाय ॥ करो तयारी फिरि द्वारे की साइति आयगईनगच्याय १०४ देवा बोला महराजा सों मानो कही चँदेलो राय ॥