आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[Header] ब्रह्माका विवाह । २२१ २५
सगो भानजो ब्रह्मा हमरो तासौं कौनि हमारी रारि ११७ सुनिकै बातें ये माहिल की बोले उदयसिंह त्यहिबार ॥ अब तुम जावो फिरि दिल्लीको मामा उरई के सरदार ११८ शंका तुमपर नहिं काहूकी मामा मानो कही हमारि ॥ रक्षक ज्यहिकी जगदम्बा है त्यहिकोसकै कौनजगमारि ११९ सुनिकै बातें ये ऊदन की माहिल घोड़ी लीन मँगाय ॥ चढ़िकै घोड़ी माहिल ठाकुर फिरि दरबार पहुंचे जाय १२० बड़ी खातिरी राजा कीन्ह्यो माहिल बैठिगयो शिरनाय ॥ माहिल बोले फिरि राजा ते मानो कही पिथौराराय १२१ खंभ गड़ावो दरवाजे पर तिनपर कलश देउ धरवाय ॥ जाँरा भौंरा दोनों हाथी तिनके आगे देउ छुड़ाय १२२ प्यायकै दारू तिन हाथिन को तुरतै मस्त देउ करवाय ॥ द्वारे आवैं जब परिमालिक तबयह बोल्योवचनसुनाय १२३ हाथी पछारो म्वरे द्वार में तुरतै भाँवरि देयँ डराय ॥ कुल की हमरे यह रीती है मानो कही चँदेलेराय १२४ अवती बचिहैं नहिं द्वारे पर मानो कही पिथौराराय ॥ इतना कहिकै माहिल चलिभे तम्बुन फेरि पहुंचे आय १२५ भई तयारी ह्वाँ दिल्ली में द्वारे खम्भ दीन गड़वाय ॥ जो कुछ माहिल बतलावाथा सो सब सामा दीन कराय १२६ गाड़ो छावा गा जल्दी सों जल्दी चौक भई तय्यार ॥ अई सुहागिल बहु दिल्ली की गावनलगीं मंगलाचार १२७ देखिकै सूरति ह्वाँ माहिल की मलखे कहे वचन यहिबार ॥ खवरि बनावो सब दिल्ली की मामा उरई के सरदार १२८ सुनिकै बातें ये मलखे की माहिल बोले वचन बनाय ॥