आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्माका विवाह । २२३ २६ आतशबाजी की शोभा अति भाला तारा के अनुमान १-- कउँधालपकनि खड्गचमकनि हूकनि गुड़गुड़दीन मचाय ॥ पैग पैग पर दूनों चलि चलि रुकिरुकिपैगपैगपर जायँ १४२ को गति बरणै महराजन कै मानो देव भूमिगे आय ॥ दो बिचवानी दउ दिशि घूमें रुकिरुकिपैगपैगपर जायँ १४३ उठै सुगन्धैं तहँ अतरन की बेला और चमेला हार ॥ का गति बरणों मैं निवारि की क्षत्री किये फूल श्रृंगार १४४ नीली पीली जंगाली औ लाली पगड़िनकेरि कतार ॥ मुँदरी छल्ला मोहनमाला क्यहुगरपरामोतिनकाहार १४५ देखें तमाशा जे नारी नर तिनका लागै नीकि बहार ॥ शाल दुशाले नीले पीले चमकैं इन्द्रधनुष अनुहार १४६ बाल सूर्य्यसम मूंगा चमकैं दमकैं तहाँ जवाहरलाल ॥ जब अगवानी पूरण हैगै गावन लगीं द्वारपरबाल १४७ संगम हैगा दुहुँ तरफा ते दूनों तरफ भये सतकार ॥ दूनों मिलिकै संगम हैकै पहुँचे पृथीराज के द्वार १४८ जौरा भौंरा हाथी ठाढ़े ताहर बोले बचन पुकार ॥ जौन शूरमा हों मोहबे के द्वारे हाथी देयँ पछार १४६ सुनिकै बातें ये ताहर की चलिभा उदयसिंह झन्नाय ॥ जावत देख्यो उदयसिंह को मलख्यो चला तुरत ठन्नाय १५० को गति बरणै दोउ बीरन की मानो चले कृष्ण बलराम ॥ ऊदन सुमिरयो श्रीशारद को मलखेलीनशिवाशिवनाम १५१ ऊदन चलिभा जौरा दिशिको मलखे भौंरा की दिशिजाय ॥ पूँछ पकरिकै तिन हाथिन कै जैसे सिंह घसीटै गाय १५२ तैसे ऊदन मलखे ठाकुर दोऊ नाग घसीटैं धाय ॥