भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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ब्रह्माका विवाह। २३३ ३७ अबहीं जावैं हम मड़येतर सबके बन्धन देयँ छुड़ाय ५६ इतना कहिकै चौंड़ा चलिभा मड़ये तरे पहुँचा आय ॥ चौंड़ा बोला फिरि आल्हाते मानो कही बनाफरराय ५७ इकलो लड़का भीतर पठवो सो लहकौरि खानको जाय ॥ मुशकें छोड़ो सब लरिकन की यह कहिदीन पिथौराराय ५८ दया आयगै मलखाने के मुशकें तुरत दीन छुड़वाय ॥ अब तुम जावो जनवासे को बोला फेरि चौंडियाराय ५६ नाउनि आई फिरि भीतर सों औ आल्हासों कह्यो सुनाय ॥ इकलो दूलह अब पठवावो रानी भीतर रहीं बुलाय ६० ऊदन बोले तब नाइनिते सांची मानो कही हमार ॥ संग न छाँड़ै सहिबाला कहूँ यह है मोहबे का व्यवहार ६१ इतना सुनिकै नाइनि बोली जल्दी चलो करो नहिं बार ॥ आगे नाइनि फिरि दूलह भा पाछे बेंदुल का असवार ६२ और बीर सब तम्बुन आये ये दोउ महल पहुँचे जाय ॥ चौंड़ा बोला पृथीराज सों आयसु मोहिं देउ फरमाय ६३ मैं अब मारों बघऊदन को औसर नीक पहुँचा आय ॥ सुनिकै बातें ये चौंड़ा की आयसु दीन पिथौराराय ६४ बिछिया अँगुठा चौंड़ा पहिरयो लीन्ह्यो रूप जनाना धार ॥ ठुम्मुक ठुम्मुक चौंड़ा चलिभा बिषधर चापे बगलकटार ६५ जायकै पहुंच्यो त्यहि महलनमें ऊदन जहाँ करै ज्यउँनार ॥ इचिता दीख्यो जब ऊदन को चौंड़ा मारी तुरत कटार ६६ खाय मूर्च्छा ऊदन गिरिगे नारिन कीन तहाँ चिग्घार ॥ भये सनाका ब्रह्माठाकुर मनमाँ लागे करन विचार ६७ आजु बीरता गै मोहबे ते जो मरिगयो लहुरवा भाय ॥