आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउदयसिंहका विवाह । २५१ १३ बड़ा लड़ैया जगमाँ जाहिर ठाकुर बेंदुलका असवार १२७ इतना सुनिकै फुलवा बोली मालिनि साँच देउ बतलाय ॥ हाथ पैर पुरुषन के ऐसे करै करै परै दिखाय १२८ इतना सुनिकै मालिनि बोली साँचे बचन करो परमान ॥ भैंसि चराई बालापनमाँ माता पिता दरिद्रीजान १२६ परी व्यवस्था लरिकाई में ताको करी कहाँलगगान ॥ जैसी गुजरी हमरे ऊपर ऐसी परै न काहू आन १३० फुलवा बोली फिरि हिरिया ते मालिनि जाउ घरै यहिबार ॥ काल्हि सबेरे यहि लैजायो साँची मानो कही हमार १३१ इतना सुनिकै हिरिया चलिमै अपने घरै पहुँचि आय ॥ फुलवा बाँदी को बुलवायो तासों चौपरलीन मँगाय १३२ खेलन लागी मालिनि सँगमाँ आधी राति गई नगच्याय ॥ लैकै पंखा बाँदी हाँकै ऊइन केर वस्त्र उड़िजाय १३३ कब्जा झलकै तलवारी का सो फुलवा के परा निगाह ॥ फुलवा बोली तब मालिनिते झलकै बगल तुम्हारे काह १३४ तुम नहिं बेटीहौ मालिनिकी औ छल किह्यो यहाँपर आय ॥ सुनि मकरन्दा तुमका पाई तुरतै खोदि लेइ गड़वाय १३५ अब पहिंचाना हम तुमको है बेटा देशराज के लाल ॥ जियत न जैहौ तुम महलनते औपारिग्योकालके गाल १३६ नाम तुम्हारो उदयसिंह है तुम्हीं बेंदुल के असवार ॥ इतना सुनिकै मालिनि बोली कीन्ह्योनीकी आजचिन्हार १३७ कहँ पै देख्यो तुम ऊदन को साँचे हाल देउ बतलाय ॥ इतना सुनिकै सब बाँदिनको फुलवा तुरतै दीन हटाय १३८ ओ फिरि बोली बबऊदन ते मानो कही बनाफरराय ॥