आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२ आल्हखण्ड । २५० पहिरि करधनी ली कम्मर में पायँन पायजेब झनकार ११५ कड़ाके ऊपर छड़ा बिराजै नीचे मेंहदी करै बहार ॥ बिछुआपहिरे सब अँगुरिन में अनवटअँगुठनकाश्रृंगार ११६ वेष जनाना ऊदन धरिकै तुरतै पालकी लीन मँग़ाय ॥ बैठि पालकी में नरनाहर मनमें सुमिरिशारदामाय ११७ हिरिया मालिनि को सँग लै कै फुलवा महल गयेनगन्याय ॥ उतरि पालकी सों नरनाहर शारदचरणकमलफिरिध्याय ११८ आगे हिरिया पाछे ऊदन फुलवा पास पहुँचे जाय ॥ फुलवा देख्यो जब ऊदन को मनमाँ बड़ी खुशी है जाय ११९ रूप देखिकै त्यहि मालिनिको मनमाँ गई सनाकाखाय ॥ कै पैताना खाली दीन्ह्यो आदरकीनफेरिअधिकाय १२० बैठि उसीसे जब ऊदनगे फुलवा बोली बचन रिसाय ॥ कैसी मालिनि यह लाई है मालिनिहालदेयबतलाय १२१ मालिनि बोली तब फुलवाते बेटी साँची देयँ बताय ॥ बेटी प्यारी परिमालिक की नौकरितासुपासकीआय १२२ राजनीति का यह जानति है राखति सबऊ सखी का भाय ॥ बैठि उसीसे यह जावै जो तौ वह क्षमा करै हर्षाय १२३ सुनिकै बातें ये मालिनि की फुलवा क्षमा कीन सुखपाय ॥ हँसिकै बोली फिरि मालिनिते साँची साँची देउ बताय १२४ कौन बहादुर परिमालिक घर कारो राजपुत्र यहिकाल ॥ बातें सुनिकै ये फुलवाकी बोला देशराजका लाल १२५ आल्हा ब्याहे हैं नैनागढ़ पथरीगढ़ै वीर मलखान ॥ पिरथी घरमाँ ब्रह्मा ब्याहे ठाकुर दिल्लीके चौहान १२६ कारो इकलो बघऊदनहै ज्यहिकै बाँड़ि बहै तलवार ॥