भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 252, कुल 618 में से

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उदयसिंहका विवाह। २४६ ९९ पारस पत्थर तिनके घरमाँ उनकी रय्यति सबै निहाल १०३ बातें सुनिकै ये मालिनि की फुलवा हुकुमदीन फरमाय ॥ हार बनायो ज्यहि मालिनि है मोको बेगि दिखावै आय १०४ इतना सुनिकै मालिनि चलिभै मनमाँ बार बार पछिताय ॥ ज्यों त्यों आई घर अपने को तहँपर मिले बनाफरराय १०५ हाल बनायो सब फुलवाको मालिनि बार बार समुझाय ॥ मारे डरके पिंडुरी काँपै जर्दी आनन परै दिखाय १०६ ऊदन बोले तब मालिनि ते काहे सोच करो अधिकाय ॥ नई पुरानी जेवर लैके हमको देउआय पहिराय १०७ देखन जैबे हम फुलवा को मालिनि मानो कही हमार ॥ शंका लावो कछु जियरे ना तुम्हरो जाय न बांकोबार १०८ कौन डुमरिहा जग हमरो है जो तुम्हरे तन करै निगाह ॥ निश्चय जानो अपने मनमाँ हमफुलवाते करब विवाह १०६ बातें सुनिकै उदयसिंह की मालिनि शंका दीन भुलाइ ॥ तुरतै गहना को लै आई पहिरनलागलहुरवाभाय ११० मिस्सी रगरी सब दाँतन में तापर लीन्ह्यो पान चबाय ॥ काजल आँज्यो दोउ नैनन में शोभा कही बूत ना जाय १११ बेंदी बँदनी टीका तीनों मस्तक ऊपर धरा सँवार ॥ करनफूल कानन में पहिरा तामें गुज्झी करें बहार ११२ मोहनमाला मोतिनमाला पहिरे और फुलनके हार ॥ बाजू जोसन टाड़ैं तीनों दोऊभुजा पहिरि सरदार ११३ नीले रँगकी चुरियाँ पहिरी गोरे हाथनका श्रृङ्गार ॥ आगे अगेला पिछे पछेला तिनविच ककनाकैरेंबहार ११४ छल्ले पहिरे सब अँगुरिन में अँगुठा लीन आरसी धार ॥

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