भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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उदयसिंहका विवाह । २६१ २३ जायके देखें जब ऊदन को रोवैं तहाँ बृद्ध औ बाल ८५ गई पालकी जब आल्हा की चकरन जाय कहा सब हाल ॥ सुनवाँ भौजीने बुलवायो चलिये देशराज के लाल ८६ हमसोंफिरिफिरि यह समुझायो आवैं यहाँ लहुरवाभाय ॥ करब दवाई हम नीकी बिधि चंगे होयँ बनाफरराय ८७ सुनिकै बातें ये चकरन की ऊदन ठीक लीन ठहराय ॥ हाल बतावब जो भौजीते हैहैं काम सिद्धि तहँ जाय ८८ यहै सोचिकै मन अपने माँ पलकी चढ़ा लहुरवाभाय ॥ चारि कहरवा हुँकरत चलिगे दशहरिपुरै पहुंचे आय ८६ उतरि पालकी ते भुइँ आवा द्यावलि देखिगई घबड़ाय ॥ रानी सुनवाँ तहँ चलिआई औ करगहिकै गईलिवाय ६० जायकै पहुंची निजमहलन में पलँगा उपर दीन बैठाय ॥ पूँछन लागी बघऊदन ते साँचे हालदेउ बतलाय ६१ आँखि लागिगै का फुलवा कै द्यावर विकलभयो अधिकाय ॥ सुनिकै बातें ये भौजीकी बोला तुरत बनाफरराय ६२ जैसे साँची तुम पुछती हौ तैसे साँच देयँ बतलाय ॥ किरिया कीन्ही हम फुलवा तै भौरी करब तुम्हारी आय ६३ काह बतावैं हम भौजी ते नाकछु सूझा और उपाय ॥ तब बौराहा बैनिकै आयन तुमते साँचदीन बतलाय ६४ इतना सुनिकै सुनवाँ बोली साँची सुनो लहुरवाभाय ॥ काठक घोड़ा बाण अजीता उनघर सेल शनीचर आय ६५ कैसे किरिया तुम कै लीन्ही देवर भूल भई अधिकाय ॥ तेहिते चुप्पे घरमाँ बैठो मानो कही बनाफरराय ६६ वैसी फुलवा लाखन मिलि हैं आपन साँच लहुरवा भाय ॥