भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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[Header] उदयसिंहका विवाह । २८१ ९३

बाजी लरिका मकरन्दा है ज्यहियहदीन्ह्यो रारिमचाय १३२ स्याबसिस्याबसि तुमेकाआल्हा काहे न विजयहोय सबकाल ॥ मलखे सुलखे जिनके भाई नामी बच्छराजके लाल १३३ मेलजोल भा दुहुँ तरफा ते हैगै मारु बन्द त्यहिकाल ॥ सातौ भाँवरि फुलवा सँगमें घूमी देशराज के लाल १३४ राजा नरपति के महलन में तुरतै भात भयो तय्यार ॥ भयो बुलौवा फिरि क्षत्रिनको पहुँचे मोहबे के सरदार १३५ जेंवन बैठे आल्हा ऊदन तबहूँ चलनलागि तलवार ॥ गेडुवा पाटन की मारुन में सबियाँ शूरगये तहँ हार १३६ कीनि नम्रता फिरि नरपतिने बेटी बिदा दीन करवाय ॥ दायज दीन्ह्यो भल नरपतिने आल्हासबधनदीनलुटाय१३७ उठी पालकी नृप द्वारेते तम्बुन फेरि पहुँची आय ॥ कूचको डङ्का बाजन लाग्यो हाहाकार शब्द गोहाय १३८ खीमा उखरे रजपूतन के सो छकरन में लिये लदाय ॥ कूच करायो नरवरगढ़ते मोहबे चले शूर समुदाय १३६ बारा दिनका धावाकरिकै दशहरिपुरै पहुँचे आय ॥ दगैं सलामी तहँ आल्हाकी सुनवाँचढ़ी अटापरधाय १४० दीख कबूतरी पर मलखाने बेंदुल चढ़ा लहुरखाभाय ॥ आल्हा इन्दल इक हौदा पर सुनवाँ गई द्वारपर आय १४१ पलकी आई तहँ फुलवा की नारिन कीन नेग सबगाय ॥ घर के भीतर के जानेकी पण्डितसाइतिदीनबताय १४२ बधू पुत्र घर भीतर गमने द्यावलि रूपन लीन बुलाय ॥ जल्दी जावो तुम मोहबे को मल्हनेखबरिजनावोजाय १४३ इतना सुनिकै रुपना चलिभा मल्हना महल पहुँचाआय ॥