भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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इन्दलहरण । २१६ ३. लड़िका ऊदन अब नाहीं हैं जो तहँ रारि मचैहैं जाय १० बातें सुनिकै ये माहिल की आल्हा बोले बचन बनाय ॥ तुम चलिजावो माहिल मामा तौ हम ऊदन देयँ पठाय ११ इतना सुनिकै माहिल बोले हम तो करब जाय असनान ॥ करो तयारी ऊदनठाकुर आल्हाबचन मानिपरमान १२ आल्हा बोले फिरि देबाते तुमहूं जाउ साथ यहिकाल ॥ पै तुम बच्यो बघऊदन को जहँपर होय रारिको हाल १३ इतना कहिकै आल्हाठाकुर महलन फेरिगयो अलसाय ॥ करै तयारी ऊदन लागे बाँके घोड़ लीन कसवाय १४ कच्छी मच्छी हरियल मुश्की सुर्खा सुरंगा रङ्ग बिरंग ॥ तुर्का गर्रा पँचकल्यानी सब्ज़ा स्याह एकही रंग १५ चुने सिपाही लिये संग में जिनते हारिगई तलवार ॥ संजा रिसाला घोड़नवाला लग भग जानो एक हजार १६ सजे सिपाही पंद्रासौ लग एकते एक लड़ैया ज्वान ॥ बाजे डंका अहर्तंका के घूमन लागे लाल निशान १७ इन्दल आये त्यहि समया में ऊदन पास पहुंचे आय ॥ हमहूं चलिबे श्री गंगा को चाचा लेवो साथ लिवाय १८ इतना सुनिकै ऊदन बोले बेटा मानो कही हमार ॥ दादा भौजी जो रोकैं ना हमरे साथ होउ तय्यार १६ इन्दल चलिभे तब महलन को माता पास पहुंचे जाय ॥ हाथ जोरिकै इन्दल बोले मातैं बार बार शिरनाय २० हुकुम कराय देउ दडुवा सों आवों चाचा साथ नहाय ॥ इतना सुनिकै सुनवाँ बोली बेटै बारबार समुझाय २१ पर्व दशहरा की टरिजावै फिरि तुम आयो गङ्ग नहाय ॥