भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 353

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३४ आल्हखण्ड । ३५० सातो लड़का अभिनन्दन के आल्हा कैदलीनकरवाय २१५ तब अभिनन्दन रिसहा ह्वैकै अपनो हाथी दीन बढ़ाय ॥ आल्हा ठाकुर पचशब्दापर राजा पास पहुँचे आय २१६ तब ललकारो अभिनन्दनने आल्हा कूच देउ करवाय ॥ जियत न जैहौ तुम सम्मुखने जोविधिआपवचावैआय २१७ इतना सुनिकै आल्हा बोले राजन साँच देयँ बतलाय ॥ बिना बियाहे हम बेटा को कैसे लौटि मोहोवे जायँ २१८ भलो आपनो जो तुम चाहौ सबकी कैद लेउ छुड़वाय ॥ हँसी खुशी सों बेटी ब्याहो काहे रारि बढ़ावो भाय २१६ बिना बियाहे हम जैबै ना बहुतन धजीधजी उड़िजाय ॥ इतना सुनिकै अभिनन्दनने मास्यो भालातुरतचलाय २२० वार बचाई तब आल्हा ने साँकरि हाथी दीन गहाय ॥ आल्हा बोले पचशब्दा ते अब गाढ़े में होउ सहाय २२१ घूमो हाथी तब आल्हा को रणमा साँकरिहा घुमाय ॥ जितने साथी अभिनन्दन के ते सब भागे पीठिदिखाय २२२ झुके सिपाही मोहवे वालै मारैं एक एक को धाय ॥ अलखे ऊदन देवा मकरँद सबियाॅलशकरदीनभगाय २२३ भागी फौजैं अभिनन्दन की इकलो रहा आप नरराज ॥ कियो लड़ाई भल इकलेई कैदी भयो फेरि महराज २२४ गंगा कीन्ही फिरि फौजन में इन्दल ब्याह द्याव करवाय। सातों लड़िकन सों महाराजा आल्हाठाकुरदीन छुड़ाय २२५ तुरतै पण्डित को बुलवायो सोऊ साइति दीन बताय ॥ भई तयारी फिरि भौरिन कै मड़ये तेरे पहुँचे जाय २२६