आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२ आल्हखण्ड । ३६वां साँचौँ माता अरु त्राता तुम धाता सृष्टि माँझ यहिकाल ॥ लखियै ऐसे नर दुर्बल को माता जानु आपनो बाल ५ छूटि सुमिरनी गै देवीकै लाखनिब्याहसुनोयहिकाल ॥ गंगाधर बूँदी का राजा ता घर ब्याह होयगो हाल ६ अथ कथाप्रसंग ॥ कुसुमा बेटी गंगाधरकी राजा बूँदी का सरदार ॥ खेलत देखा सो बेटी का यौवन जानिपरा त्यहिबार १ लाग विचारन मन अपने मा बेटी ब्याहन के अनुसार ॥ नव अरु आठ दशै वर्षनमा ज्योतिपशास्त्रदीनअधिकार २ फिरि तौ गिनती ना कन्याकी यह मन कीन्ह्यो खूब विचार ॥ म्वती जवाहर दो बेटाथे तिनका बोलिलीन त्यहिबार ३ हाल बतावा मन अपने का राजा बार [बार समझाय] ॥ घरवर नीको जहँ तुम देखो त्यहिघर टीका [दीजो जाय] एक मोहोवे तुम जायो ना तहँपर रहें [बनाफर राय] ॥ जाति बनाफर की हीनी है हल्ला देश दे[श महँ] काय ५ इतना कहिकै महराजा ने सबियाँ सामा दीन मँगाय ॥ चला जवाहर तब बूँदी ते राजै बार बार शिरनाय ६ तीनिलाख को टीका लै कै दील्लीशहर पहुँचा जाय ॥ हाल जानिकै पृथीराज ने टीका तुरत दीन लौटाय ७ चौरीगढ़ में वीरशाह घर पहुंचा फेरि जवाहरजाय ॥ सोऊ जादूकी शंका ते टीका तुरत दीन लौटाय ८ तहँतेचलिकै फिरिविसहिनगा जहँपर बसैं बिसेनेराय ॥ लागि कचहरी गजराजा की शोभा कही बूत ना जाय ६ सोने सिंहासनपर सोहत है राजा बिसहिन का सरदार ॥