भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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लाखनिका विवाह । ३६६ ३

दीन जबाहिर तहँ चिट्ठी को, राजा पढ़नलाग त्यहिबार १० पढ़िकै चिट्ठी गंगाधरकै टीका तुरत दीन लौटाय ॥ तबै जबाहिर मन खिसियाने पहुँचे फेरि कनौजै जाय ११ लागि कचहरी तहँ जयचँदकै भारी लाग राज दरबार ॥ आल्हा ऊदन तहँ बैठे हैं बैठे बड़े बड़े सरदार १२ दीन जबाहिर तहँ चिट्ठी को जयचँद आँकु आँकु पढ़िलीन ॥ पढ़िकै चिट्ठी वापस दीन्ह्यो हाँहूँ कछू नहीं नृप कीन १३ तबै जबाहिर यह बोलत भा दोऊ हाथजोरि शिरनाय ॥ लाखनि काँरे हैं तुम्हरे घर यह हम आयनपताल गाय १४ आयसु पावैं महाराजा को तौ हम टीका देयँ चढ़ाय ॥ इतना सुनिकै जयचँद बोले तुमते साँचदेयँ बतलाय १५ ब्याह न करिबे हम तुम्हरे घर डाँपर जादू को अधिकाय ॥ इतना सुनिकै ऊदन बोले दोऊ हाथ जोरि शिरनाय १६ टीका आयो घर तुम्हरे है राजन लीजै आप चढ़ाय ॥ कौन दुसरिहा नृप तुम्हरो है ज्यहिभयकरौ कनौजीराय १७ औरो बोले त्यहि समया मा साँची कहौ बनाफरराय ॥ सम्मत सब का जयचँद लै कै तब पण्डितते कहा सुनाय १८ देखो साइति यहि समया मा टीका लीनजाय चढ़वाय ॥ सुनिकै वातैं महाराजा की पंडित साइति दीन बताय १९ पाख अँधरिया तिथि तेरसिऔ फागुन मास सुनो महराज ॥ भौरिन केरी शुभ साइति है ह्वैहैं सुफल आपके काज २० पै यहि बिरिया शुभ साइति में टीका आप लेउ चढ़वाय ॥ इतना सुनिकै महराजा ने महलन खबरिदीन पठवाय २१ खबरि पायके महरानी ने चौका तुरत लीन लिपवाय ॥ २४