भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 379, कुल 618 में से

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पृष्ठ 379

१२ आल्हखण्ड । ३७८ कहि समुझावा तब मालिनिको फौजन तुरतदीन पठवाय ११६ नाइनि बारिनि तेलि तँबोलिनि मालिनिधोबिनि के समुदाय ॥ साँची दूती रस ग्रन्थन में भाषा चतुरन खूब बनाय ११७ सोई मालिनि चलि बूँदी ते फौजन अटी तड़ाका धाय ॥ पता लगायो तहँ आल्हा को चँकरन तम्बूदीन बताय ११८ बेला चमेलिन के हरवा को मालिनि तुरत दीन पहिराय ॥ कह्यो सँदेशा तहँ ऊदन का मालिनि वारवार सब गाय ११९ जो सुधि पावैं बूँदी वाले हमरो पेट देयँ फरवाय ॥ भुसा भरावैं ते पेटेमा तुमकासाँच दीन बतलाय १२० इतना सुनिकै आल्हा ठाकुर मुहरें सात दीन पकराय ॥ मालिनि चलिभै तब फौजनते बेटी पास पहुँची आय १२१ खबरिसुनाई सब जयचँद को आल्हा वार वार समुझाय ॥ तब महराजा कनउज वाला डंका तुरतदीन बजवाय १२२ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न मे असवार ॥ झीलमबख्तर पहिरि सिपाहिन हाथम लई ढाल तलवार १२३ तोपैं चढ़ि गईं सब चर्खन मा गोला तुरत दीन छुटवाय ॥ चढ़े जवाहर औ मोती दोउ तोपनआगिदीनलगवाय १२४ तोपैं छूटीं दुहुँ तरफा ते धुवना रहा सरग में छाय ॥ बड़ी दुर्दशा भै तोपन मा तबफिरिमारुवन्द है जाय १२५ गोली ओला सम वर्षत भइँ सननन सन्न सन्न सन्नाय ॥ दुनो गोल आगे का बढ़िगे सम्मुख भये समरमें आय १२६ भाला बलछी तलवारिन की लागी होन भड़ाभड़ मार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १२७ ना मुहँ फेरैं बूँदी वाले ना ई कनउज के सरदार ॥

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