भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 392

अथ आल्हखण्ड ॥ गाँजर की लड़ाईका प्रारम्भ ॥ सवैया ॥ दानिन में बलि औ हरिचन्द शिबी दधि कर्ण इन्ही यश पाये । बीरन में गिनती रघुबीर औ धीरन कृष्ण युधिष्ठिर गाये ॥ पापिन औ परितापिन में जग कंस दशानन बीर सुनाये । जापिन योग उदार अपार सदाशिवही ललिते मन आये १ सुमिरन ॥ प्रथमै ध्यावों श्री गणेश को लीन्हे सुभग पुस्तकी हाथ ॥ करों बन्दना शिवशंकर की दूनों धरों चरणपर माथ १ देवि दुर्गा को ध्यावों फिरि लैके रामचन्द्र को नाम ॥ कीरति गावों मैं ऊदन कै पूरणकरो हमारो काम २ देवि शारदा मइहरवाली मनियादेव महोबे केर ॥ ध्यावों ललिता नैमिषार की माता मोरि दीनता हेर ३ नहीं बीरता कछु मोमें है तव बल धरी धीरता हीय ॥