आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
DevanagariHindipublished618 पृष्ठ
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२४ आल्हखण्ड । ३६० पूर विवाह भयो लाखनि को हँाते करों. तरंगको अन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही भवानी कन्त ७४ इति श्रीलखनऊनवासि (सी, आई, ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजवाबूप्रयागनारायण जीकी आज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलांनिवासि मिश्र वंशोद्भवबुध कृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृत लाखनि पाणिग्रहणवर्णनोनामद्वितीयस्तरंगः २ ॥ लाखनिरानाजीका विवाह सम्पूर्ण ॥ इति ॥